Top 10+ Baccho ki kahani । बच्चों की कहानी इन हिंदी: Bacchon Ki Kahani

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चार मित्रो की कहानी

Baccho ki kahani Four Friends Stories: राम, श्याम, राहुल और सोहन एक ही गांव के रहने वाले चार अच्छे दोस्त थे। वे लोग बचपन से ही एक साथ खेलते, पढ़ते और मस्ती करते। उनकी दोस्ती बेहद गहरी थी और वे एक-दूसरे के साथ किसी भी मुश्किल हालात में खड़े रहने को तैयार रहते।

एक दिन वे लोग स्कूल से लौट रहे थे और उन्हें घने जंगल के रास्ते से होकर गुजरना था। रास्ते में चलते-चलते अचानक झाड़ियों से एक भयंकर शेर निकला और सीधा उनकी तरफ दौड़ा! सभी बहुत डर गए और अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे।

राम तेज दिमाग का था, उसने फौरन एक पेड़ पर चढ़ जाने का फैसला किया। श्याम और सोहन भी उसके पीछे-पीछे दूसरे पेड़ पर चढ़ गए। लेकिन राहुल इतना डर गया था कि वह पेड़ पर चढ़ नहीं पाया और शेर के सामने ही खड़ा रह गया!

जैसे ही शेर राहुल के करीब पहुंचा, राम ने हिम्मत जुटाई और पेड़ से कूदकर शेर पर टूट पड़ा। उसने अपनी लाठी से शेर की जमकर पिटाई की। इससे शेर बुरी तरह ज़ख्मी हो गया और वहाँ से भाग खड़ा हुआ। राम की इस साहसिक करतूत से उसके तीनों दोस्तों की जान बच गई।

इस घटना के बाद से राहुल राम का कृतज्ञ बन गया क्योंकि उसने अपनी जान जोखिम में डालकर राहुल की जान बचाई थी। राहुल ने राम को अपना जीवनभर का ऋणी और सच्चा मित्र माना। श्याम और सोहन भी राम की बहादुरी और दोस्ती की कद्र करने लगे। इस घटना ने चारों मित्रों के बीच की दोस्ती को और भी मजबूत बना दिया।

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बूढ़ा धनी व्यक्ति और सूंदर कन्या – बच्चों की कहानी

हमारे गांव में एक बूढ़ा धनी व्यक्ति रहता था। उसका नाम था कालू सेठ। वह बहुत ही व्यापारी था और उसके पास काफी संपत्ति थी। लेकिन उसे एकमात्र संतान ना थी।

एक दिन कालू सेठ ने तय किया कि वो अपना सारा संपत्ति उस लड़की को देगा जो उससे शादी करेगी। यह सुनते ही हमारे गांव की एक बहुत ही सुन्दर कन्या मीरा ने कालू सेठ से शादी करने का फैसला किया। वह गरीब परिवार से थी और कालू सेठ की संपत्ति से लुभाई।

शादी हो गई और मीरा, कालू सेठ के घर आ गयी। धीरे-धीरे मीरा और कालू सेठ में प्यार हो गया। लेकिन कुछ दिनों बाद कालू सेठ की मृत्यु हो गयी। अपने वसीयत में उसने सारी संपत्ति मीरा के नाम कर दी।

मीरा अब धनवान हो गयी थी। गांव के कई लोग उससे पैसे उधार लेने लगे और धीरे-धीरे मीरा से पैसे वसूलने के लिए दबाव डालने लगे। मीरा के पास इतनी संपत्ति संभालने की क्षमता नहीं थी।

एक दिन मीरा घर से भाग निकली और कभी वापस नहीं लौटी। धीरे-धीरे उसकी सारी संपत्ति दूसरों के हाथ में चली गयी। अंत में मीरा कुछ भी नहीं बचा पाई जो कालू सेठ ने उसे सौंपा था।

इस कहानी से सीख यह मिलती है कि धन कमाना आसान है लेकिन उसे संभालकर रखना मुश्किल। हमें चाहिए कि जो कुछ हमारे पास है, उसका सही उपयोग करें और दूसरों को भी लाभ पहुँचाए।

बेवकूफ गधा प्रसाद की Bacchon ki kahani

एक गांव में बेवकूफ गधा प्रसाद रहता था। वह अपने मालिक रामू कटारिया की बहुत सेवा करता था। रोज रामू उसे लदान करके शहर ले जाता और समान विक्रय करके लौटता।

एक दिन की बात है, प्रसाद बोझ लादकर शहर की तरफ जा रहा था। रास्ते में एक तालाब आया। उसमें प्रसाद ने अपना प्रतिबिम्ब देखा। वह सोचने लगा कि यह एक और सुंदर गधा है जो मुझसे मिलना चाहता है। वह उस गधे से बात करने लगा परंतु वह गधा उसकी बातों का जवाब नहीं दे रहा था।

प्रसाद ने सोचा कि शायद यह गधा मुझसे नाराज है। इसलिए मैं इसे चंदान का एक टुकड़ा भेंट करूंगा। वह अपने मुंह से चंदान का टुकड़ा लेकर सामने वाले गधे को देने के लिए झुका। लेकिन टुकड़ा पानी में गिर गया।

फिर प्रसाद ने सोचा कि इस गधे को मीठा गन्ना अच्छा लगेगा। वह बोझ से गन्ना निकाल कर देने को झुका तो गन्ना भी पानी में गिर गया। इस तरह प्रसाद ने अपना सारा सामान उस गधे को खिलाने की कोशिश में गवा दिया।

जब रामू ने प्रसाद को खाली हाथ लौटते देखा तो वह बहुत गुस्से में आ गया और प्रसाद की जमकर पिटाई कर दी। उस दिन से प्रसाद समझ गया कि वह अपने ही प्रतिबिंब को दूसरा गधा समझ रहा था और अपना सारा सामान व्यर्थ गंवा दिया।

चुहिया का स्वयंवर Bachho की कहानी

जंगल में चूहों के एक झुंड का रहता था। उनमें से सबसे खूबसूरत चूही का नाम रंची था। उसकी उम्र शादी के लिए पूरी हो चुकी थी।

एक दिन चूहों ने रंची का स्वयंवर करने का फैसला किया। स्वयंवर में हिस्सा लेने के लिए चूहों के सारे झुंड आमंत्रित किए गए। उस दिन जंगल का माहौल बेहद ख़ुशनुमा था। हर ओर से चूहों की भीड़ जमा होने लगी।

स्वयंवर शुरू हुआ और रंची ने अपने लिए जीवनसाथी चुनना शुरू कर दिया। उसने कई चूहों को अस्वीकार कर दिया। अंत में उसने एक काले रंग के चूहे मुन्ना को चुना जो उसकी तुलना में छोटा दिखता था।

सभी चूहों ने चौंककर रंची से पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रही है? तब रंची ने कहा कि मैंने सही जीवनसाथी के लिए मुन्ना को चुना है। वह शारीरिक रूप से तो छोटा दिखता है, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा है।

कल रात मुझे बिल्ली के जंजीर से बचाते हुए उसने अपना पंजा गंवा दिया। उसके प्राणों की परवाह किए बिना उसने मुझे बचाया। ऐसे दिलवाले चूहे को ही मैं अपना जीवनसाथी बनाना चाहती हूं।

यह सुनकर सभी चूहों ने तालियाँ बजाईं और रंची के फैसले की सराहना की। उन्हें एहसास हुआ कि शारीरिक सुंदरता से ज्यादा महत्वपूर्ण इंसानियत और अच्छा चरित्र होता है।

चालाक लोमड़ी Bachho Ki Kahani: Kids Stories in Hindi

एक जंगल में एक बूढ़ी लोमड़ी अपने बच्चों के साथ रहती थी। वह अपने बच्चों को खिलाने के लिए हर रोज़ जंगल में भोजन की तलाश में निकलती।

एक दिन उसे एक तालाब के किनारे एक मछली मिली। वह मछली पकड़ने के लिए पानी में कूद गई, लेकिन मछली तैरकर दूर निकल गई। लोमड़ी निराश होकर किनारे पर आई और सोचने लगी कि मछली को कैसे पकड़ूं।

उसे एक बहुत ही चालाक आइडिया आया। उसने घास-पत्तियां इकट्ठी कीं और धीरे-धीरे तालाब में डालने लगी। तालाब का पानी ऊपर से घास-पत्तियों से ढक गया और ऐसा लगने लगा जैसे तालाब सूख गया है।

जब मछली ने इसे देखा तो वह तालाब से बाहर निकल आई। लेकिन जैसे ही वह बाहर आई, लोमड़ी ने एक छलांग लगाकर उसे पकड़ लिया और अपने बच्चों के लिए खाने के लिए ले गई।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमें हर समस्या का हल निकालने के लिए चालाक व तर्कसंगत तरीके से सोचना चाहिए। कभी-कभी हमारे पास सीधे तरीके होते हैं समस्या को हल करने के लिए, लेकिन चालाकी से सोचकर भी हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।

पालतू बंदर और मक्खी की कहानी

एक गांव में रमेश नाम का एक लड़का रहता था। उसके पास एक प्यारा सा पालतू बंदर था। रमेश हर वक्त उस बंदर के साथ खेलता और मस्ती करता।

एक दिन रमेश बाजार गया हुआ था। तभी उसके घर में एक मक्खी आकर बैठ गई। बंदर को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। वह मक्खी को भगाने की कोशिश करने लगा। लेकिन मक्खी वहाँ से हिली नहीं।

बंदर ने सोचा कि मैं इस मक्खी का पीछा करूंगा और फिर मार डालूंगा। वह मक्खी के पीछे-पीछे भागने लगा। मक्खी ने उसे लम्बे समय तक भागाया और आखिरकार बंदर थक कर बैठ गया।

कुछ देर बाद मक्खी वापस आई और बंदर के सामने बैठ गई। बंदर फिर से गुस्से में आ गया और दौड़-दौड़ कर मक्खी का पीछा करने लगा। यह चक्कर कई बार चलता रहा और हर बार बंदर को मक्खी का पीछा करते-करते थकान हो जाती।

आखिरकार बंदर बहुत थक गया और उसने समझ लिया कि वह मक्खी को मार ही नहीं पाएगा। उसने हार मान ली और मक्खी को अपनी मर्ज़ी से बैठने दिया। थोड़ी देर बाद मक्खी खुद ही उड़कर चली गई।

इस कहानी से सीख यह मिलती है कि हमें किसी भी स्थिति में गुस्सा नहीं करना चाहिए। गुस्से से काम बिगड़ते हैं। धैर्य रखना चाहिए और शांति से काम लेना चाहिए। जल्दबाजी में की गई कार्रवाई से हानि हो सकती है।

शातिर बगुला की कहानी

एक तालाब में कमल के पौधे पर एक बगुला अपना घोंसला बनाए रहता था। वहां के कमलों को खाकर वह अपना पेट भरता। एक दिन किसी ने उस बगुले को देख लिया और उसकी शिकायत मालिक से कर दी।

मालिक ने फौरन बगुले को भगा दिया और उसका घोंसला तोड़ डाला। बगुला बेघर हो गया। वह सोचने लगा कि अब मैं क्या करूं। इधर-उधर भटकने के बाद उसे ध्यान आया कि वह अपने आप को किसी मुर्दे हुए पक्षी की तरह बीमार दिखाए।

उसने तुरंत एक ऐसी जगह ढूंढी जहां कुत्तों का एक झुंड रहता था। वह वहां जाकर जमीन पर लेट गया और अपने पंख फैला दिए जैसे वह मरने वाला है। जब कुत्तों ने उसे वहां पड़ा देखा तो वे उसे खाने के लिए दौड़े।

जैसे ही वे पास आए, बगुला तेजी से उड़ गया और वहां से भाग निकला। कुत्ते अपनी भूल समझ गए। कुछ दिनों तक बगुला फिर किसी और जगह जाकर ऐसा ही नाटक करता और हर बार बच निकलता। इस तरह उसने अपना पेट पाला।

इससे हमें सीख मिलती है कि हमें हर हाल में अपना पेट पालने के लिए चालाक और होशियार बनना चाहिए। कभी-कभी हमें भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है लेकिन चतुराई से काम लेने पर हम हर समस्या से निपट सकते हैं। New Baccho ki kahani

दो बकरियो की कहानी

एक गांव में रामू नाम का एक किसान रहता था। उसके पास दो बकरियाँ थीं जिनके नाम काली और गोरी थे। दोनों बकरियाँ बहुत अच्छी दोस्त थीं और हमेशा साथ में रहती थीं।

एक दिन काली बकरी बीमार पड़ गई। गोरी बकरी रोज़ उसकी सेवा करती, उसके साथ बैठती और उसे संभालती। धीरे-धीरे काली बकरी की हालत बिगड़ती गई और एक दिन उसकी मौत हो गई।

रामू को बहुत दुख हुआ। उसने काली बकरी को जंगल में दफना दिया और गोरी बकरी को घर ले आया। गोरी बकरी अकेलेपन के कारण बहुत उदास रहने लगी।

एक दिन बाजार से सब्जियां लेकर रामू लौट रहा था कि रास्ते में उसे एक घायल बकरी मिली। उसने उस बकरी को घर लाकर गोरी बकरी के सामने रख दिया और कहा- गोरी, ये तेरी नई साथी है। अब तुम दोनों साथ में खेलना।

गोरी बकरी बहुत खुश हुई और नई बकरी के साथ दोस्ती कर ली। दोनों बकरियां फिर से खुशी-खुशी रहने लगीं।

इससे हमें सीख मिलती है कि अगर हम किसी को खो दें तो हमें उदास नहीं होना चाहिए। हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए और नए रिश्ते बनाने चाहिए। पुराने रिश्तों की यादें हमेशा दिल में रहती हैं लेकिन ज़िंदगी रुकी नहीं रह सकती। Baccho ki kahani in hindi

मेंढक और चूहा की कहानी

एक बार एक मेंढक और एक चूहा मित्र बन गए। दोनों कई महीनों तक एक साथ रहे। मेंढक झील के किनारे रहता था और चूहा उसी झील के पास बने एक बिल में।

एक दिन मेंढक ने चूहे से कहा- मेरे घर आओ, मेरी पत्नी से मिलो। चूहे ने स्वीकार कर लिया और मेंढक के साथ उसके घर गया। मेंढक की पत्नी ने चूहे का स्वागत किया।

कुछ दिनों बाद चूहे ने भी मेंढक से अपने घर आमंत्रित किया। मेंढक चूहे के बिल में गया। चूहे की पत्नी ने भी मेंढक का स्वागत किया और उसे बहुत सम्मान दिया।

दोनों ने एक-दूसरे के घर खाना खाया और अच्छे से समय बिताया। इस तरह दोनों की मित्रता और गहरी हुई। लेकिन एक बार जब चूहा मेंढक के घर गया तो मेंढक ने उसे नहीं पहचाना।

चूहे ने उसे याद दिलाने की कोशिश की मगर मेंढक कहने लगा कि वह उसे जानता ही नहीं। चूहा बहुत दुखी हुआ और समझ गया कि मेंढक ने उसकी मित्रता भूला दी है। best Baccho ki kahani

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमें अपने पुराने मित्रों की कभी अनदेखी नहीं करनी चाहिए और उनके साथ समय बिताना चाहिए। नहीं तो मित्रताएं टूट सकती हैं।

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